December 4, 2020

तो क्या विदेशी कोचों पर निर्भरता से बनेंगे आत्मनिर्भर?

Aatm Nirbhar Bharat

क्लीन बोल्ड/ राजेंद्र सजवान

आईपीएल का 13वाँ संस्करण अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है| शुरुआत में लगाई जा रही तमाम अटकलबाज़ियो को ग़लत साबित करते हुए आयोजकों प्रायोजकों, खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और अन्य ने दिन रात की मेहनत और निष्ठा से वह कर दिखाया जिसके बारे में सोच कर भी डर लगता था।

कोविड 19 के चलते देश और दुनिया भर के खिलाड़ी डरे सहमे थे और यह मान चुके थे कि इस बार का आयोजन कोरोना की भेंट चढ़ जएगा। दाद देनी होगी आयोजक भारतीय क्रिकेट बोर्ड की जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि बीसीसीआई दुनिया के चोटी के खेल संगठनों में यूँ ही शुमार नहीं किया जाता।

महामारी के चलते जहाँ एक ओर तमाम भारतीय खेल, खेल संगठन, खिलाड़ी, अधिकारी, कोच आदि चार दीवारी में क़ैद थे तो आईपीएल के आयोजको ने यूएई में शानदार आयोजन कर दिखा दिया कि हौंसले बुलंद हों और इरादे नेक हों तो कोई भी काम मुश्किल नहीं। इस बार के आयोजन ने तमाम भारतीय खेलों और उनके आकाओं की आँखें तो खोली हीं, हैसियत का आईना भी दिखाया है। आम तौर पर अन्य भारतीय खेल क्रिकेट को कोसने और गाली देने को प्राथमिकता मानते आए हैं।

यह जानते हुए भी कि टोक्यो ओलंपिक कोरोना के कारण स्थगित हुआ है और सभी खेलों को तैयारी के लिए साल भर मिला था पर ओलंपिक खेल कोई ठोस योजना नहीं बना पाए। उल्टे हुआ यह कि कोरोना काल में भारतीय ओलंपिक संघ में गुटबाजी का खेल खेला गया और अधिकारी लड़ते भिड़ते रहे। कोर्ट द्वारा 57 खेलों की मान्यता रद्द किए जाने के कारण भी खेल प्रभावित हुए।

आईपीएल का आयोजन ठीक वैसा ही है जैसे इटली, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी स्पेन आदि देशों की फुटबाल लीग और यूईएफए चैम्पियंस लीग। फुटबाल लीग की तरह आईपीएल में भी स्टेडियम खाली पड़े रहे लेकिन क्रिकेट ने दिखा दिया कि भारत में उसके चाहने वालो और शानदार आयोजन करने वालों का कोई सानी नही है।

हालाँकि आईपीएल के चलते कुछ कोरोना मामलों के कारण टीमों पर असर पड़ा लेकिन आयोजकों ने यूएई की कंपनी ने हज़ारों टेस्ट कराए, करोड़ों का खर्च हुआ। खिलाड़ियो अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ का लगातार कारोना टेस्ट किया गया, जोकि अपनी किस्म का एक रिकार्ड है।

भले ही मैचों का आयोजन खाली स्टेडियमों में किया गया लेकिन टीवी पर मैच देखने वालों को भी पैसे वसूल हुए। क्रिकेट एक्सपर्ट्स, खिलाड़ी और जानकार मानते हैं कि पिछले 12 संस्करणों की तुलना में इस बार के मुक़ाबले बेहद करीबी और रोमांचक रहे। गेंदबाजी, बल्लेबाजी और क्षेत्र रक्षण ना सिर्फ़ शानदार रहा अपितु कई अभूतपूर्व प्रदर्शन और रिकार्ड भी देखने को मिले।

बेशक, जब कभी कोविड 19 का ज़िक्र आएगा, रिकार्ड पुस्तिकाओं में कोरोना के कहर के चलते आईपीएल के हिम्मत और हौंसले की भी चर्चा होगी। साथ ही यह भी उल्लेख होगा कि भारतीय ओलंपिक खेल कायरों की तरह बिल में छुपे बैठे थे।

अन्य खेलों से जुड़े पूर्व चैम्पियन कहते हैं कि भारतीय खेलों के पास क्रिकेट जैसी योजना , सूझबूझ और रणनीति नहीं है। लेकिन कोई इन नकारा खेलों से पूछे कि अपनी विफलता के लिए क्रिकेट को क्यो कोसते हैं। इस बार के आईपीएल ने यह भी साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट को संचालित करने वाले बीसीसीआई का कद खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ से भी बहुत उँचा है।

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