November 27, 2020

आखिर कब तक झूठ बोलोगे, कब तक देश को गुमराह करोगे?

Covid 19 effect on sports

क्लीन बोल्ड/ राजेंद्र सजवान

भले ही भारतीय खेलों के कर्णधार बड़े बड़े दावे करें, भारत को खेल महाशक्ति बनाने का डंका पीटें लेकिन कोविड 19 हमारे खेलों को कई साल पीछे धकेल दे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा देश के खेल जानकारों, पूर्व खिलाडियों और कोचों का मानना है।

ऐसा नहीं है कि कोरोना काल के चलते अन्य देशों के खेलों पर असर नहीं पड़ेगा। फर्क खेल हैसियत का है। कोरोना की चपेट में पूरी दुनिया आई है । बीमारी ने गरीब अमीर को नही देखा पर बाकी देशों के पास उन्नत तकनीक है। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों में खेल पूरी तरह रुके नहीं। जापान , चीन , कोरिया जैसे देश भी अपनी तैयारी का संकेत देते रहे हैं।

लेकिन भारत में खेल गतिविधियों के नाम पर सिर्फ खेल मंत्रालय और खेल संघों की बयानबाजी चल रही है। मंत्री जी तो कुछ ज्यादा ही विश्वास से भरे हैं। जब तब रिकार्डतोड़ प्रदर्शन का नारा लगा देते हैं। खेल मंत्री, साई के बड़े और आईओए तो यहां तक कहने लगे हैं कि भारत 2028 के ओलयम्पिक में पहले दस देशों में शामिल होगा।

लेकिन दावे करने वाले और देश को गुमराह करने वाले यह भूल रहे हैं कि यदि टोक्यो ओलंपिक बाधित हुआ या रद्द होता है तो अधिकांश भारतीय खिलाड़ी चार साल बाद के ओलयम्पिक में नहीं खेल पाएंगे। अधिकांश पहलवान, मुक्केबाज, एथलीट, हॉकी टीमों के खिलाड़ी पदक की उम्मीदों के हिसाब से बुढा चुके होंगे। बैडमिंटन और निशानेबाजी से जुड़े खिलाड़ी भी ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाले। यह न भूलें की हमारे अधिकांश खिलाड़ी उम्र की धोखाधड़ी के लिए बदनाम रहे हैं।

भारतीय खेलों के सबसे कमजोर पहलू के बारे में पूछे जाने पर अधिकांश एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अपने देश में दूसरी और तीसरी कतार के खिलाड़ी नदारद हैं। चार साल बाद कि टीम तैयार करने के लिए किसी भी खेल के पास युवा खिलाड़ी नहीं हैं। मसलन सुशील और योगेश्वर जैसे पहलवान नजर नहीं आ रहे तो मैरीकॉम, विजेंदर सिंह, अभिनव बिंद्रा, सायना, सिंधु का स्थान लेने वाले खिलाड़ी भी ज्यादा नहीं हैं।

यह न भूलें कि इन चैंपियनों को पदक जीतने के लिए दस से बारह साल की कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। जहां तक पुरुष और महिला हॉकी टीमों की बात है तो दोनों ही टीमें बड़ी उम्र वाले खिलाड़ियों के चलते दौड़ नहीं पाएंगी।

यदि अच्छे और पदक विजेता खिलाड़ियों का अकाल पड़ा तो निश्चित रूप से खेल मंत्रालय जिम्मेदार होगा, जिसने खेलो इंडिया जैसी बीमार योजना शुरू कर खेल बजट का पैसा बर्बाद किया है। भला 18 से 25 साल के खिलाड़ी कितने साल तक चल पाएंगे। खेलो इंडिया में बड़ी उम्र और डोप के मामले भी भारतीय खेलों की नंगई को दर्शाते हैं।

क्लीन बोल्ड ने रियो ओलंपिक की संभावनाओं के बारे में जब खेल मंत्री सोनोवाल से पूछा तो उन्होंने 12 पदक जीतने का दावा किया था। अब कुछ ऐसा ही झूठ वर्तमान खेल मंत्री बोल रहे हैं। हो सकता है उन्हें उनके मंत्रालय और साई के अधिकारी गुमराह कर रहे हों।

बेहतर यह होगा मंत्री जी और वरिष्ठ अधिकारी खेल संघों और आईओए से लिखित में रिपोर्ट मांगे ताकि ओलंपिक में फजीहत होने पर उनकी गर्दन पकड़ी जा सके। देश को धोखा न दें। पोल आगामी ओलंपिक में खुल जाएगी।

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