January 15, 2021

फ़ूड सप्लीमेंट के नाम पर बिक रही मौत!

Death is being sold in the name of food supplement

क्लीन बोल्ड/ राजेन्द्र सजवान

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा.नरेंद्र बत्रा ने तमाम खेल संघों को आगाह किया है कि अपने खिलाड़ियों को नकली फ़ूड सप्लीमेंट से बचा कर रखें। मुजफ्फर नगर पुलिस द्वारा फेक सप्लीमेंट का जखीरा पकड़े जाने के बाद आईओए ने अपने खिलाड़ियों को ऐसे असामाजिक तत्वों से सावधान रहने को कहा है।

कोविड19 के चलते वैसे ही आम भारतीय खिलाड़ी हैरान परेशान हैं। कोरोना उन्हें खेल मैदानों में जाने से रोक रहा है तो लंबे समय तक जिम और हेल्थ क्लब भी बंद पड़े थे। अब कुछ एक शहरों में जिम खुले हैं। नतीजन कई महीनों से इंतजार कर रहे बॉडी बिल्डर, पावर लिफ्टर , वेट लिफ्टर और अन्य खिलाड़ी जिमों की तरफ दौड़ पड़े हैं। खोई फार्म को तुरत फुरत में पाने के लालच से फ़ूड सप्लीमेंट की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में नकली माल पर असली की मुहर लगा कर बाजार में उतार दिया गया है।

मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा पकड़े गए डब्बों की कीमत चार से पांच करोड़ बताई जा रही है। देश के अन्य राज्यों और बड़े शहरों में भी इस प्रकार के मामले पकड़ में आ सकते हैं। कारण जिम कल्चर के फैलाव के बाद से देश के युवाओं में फेक सप्लीमेंट खाने और शरीर बनाने की होड़ सी लगी है। इस कुप्रथा का असर उन खिलाड़ियों पर भी पड़ा है जोकि विभिन्न खेलों में देशका प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में आईओए और खेल संघों का चिंतित होना वाजिब है।

यह न भूलें कि कोरोना के कारण स्थगित हुए ओलंपिक खेलों के लिए चंद महीने बचे हैं। अन्य देशों के खिलाड़ियों की तरह हमारे खिलाड़ियों की तैयारी पर भी असर पड़ा है। जिन्हें अभी तक ओलंपिक टिकर नहीं मिला है उनका लक्ष्य क्वालीफाई करने का होगा, जबकि टिकट पाने वाले प्रदर्शन में रातों रात सुधार चाहते हैं। यही लालसा उन्हें गलत दवा और सप्लीमेंट लेने के लिए बाध्य कर सकती है।

खेल जानकारों और भारतीय खिलाड़ियों और खेल संघों की नब्ज पकड़ने वालों को इस बात का डर है कि कोरोना के चलते नशाखोर खिलाड़ियों की तादात बढ़ सकती है। पकड़े जाने पर वे कोरोना से बचाव के लिए दवा लेने का बहाना बना सकते हैं।

वैसे भी हमारे खिलाड़ियों का पिछला रिकार्ड बेहद शर्मनाक रहा है। कई खिलाड़ी पकड़ में आये हैं। खेल मंत्रालय और आईओए के बार बार आगाह करने के बावजूद हमारे खिलाड़ी फ़ूड सप्लीमेंट के नाम पर डोप या हानिकारक खुराक लेते रहे तो उनको पदकों के साथ साथ जान से भी हाथ धोने पड़ सकते हैं।

जांच से यह भी पता चला है कि भारत में डब्बे बेचने का गोरख धंधा जोर शोर से चल रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि बड़ी से बड़ी कंपनियों और बड़े ब्रांड का माल नकली मुहर के साथ बाजार में बिक रहा है, जिसे खा कर युवा गंभीर बीमारी के शिकार हो रहे हैं और छोटी उम्र में जान गंवा रहे हैं।

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